Thursday, April 15, 2010

कनेक्शन्स कैसे कैसे !!!

सोचने बैठता हूँ तो,
कभी कभी लगता है जैसे,
लगता है जैसे तुमको,
महसूस हो रहा हो वो सब,
वो सब जो मैने सोचा, चाहा,
देखा, सुना या देखना सुनना चाहा...

जबकि मैं ये जानता हूँ कि,
कोई न्यूरल कनेक्शन नहीं,
ना ही कुछ ब्लूटूथ के जैसा है...

फिर भी कभी कभी,
कभी कभी लगता है जैसे,
जैसे ब्रेन के सिवा भी,
और कनेक्शन्स हो सकते हैं...

13 comments:

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

Neural Network hoga boss!! :) AI ka zamana hai :D

Udan Tashtari said...

बड़ा गहरा सोचा..जरुर होगा कोई न कोई और कनेक्शन!

संजय भास्‍कर said...

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

अनिल कान्त said...

gahri soch !

दिगम्बर नासवा said...

ऐसे कनेक्शन को शायद टेलीपेथि तो नही कहते ....
बहुत ही गहरी रचना ...

मनोज कुमार said...

कभी-कभी नहीं हमेशा ही इतनी भावपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत करते रहें।

रश्मि प्रभा... said...

aapki rachnaon ka apna nirala andaj hai, main vismayvimugdh padhti hun

शरद कोकास said...

कनेक्शन और भी हैं.....

Anonymous said...

aaj pehli bar padha. bahut accha likhte ho.

Anamikaghatak said...

कनेक्शन तो वाकई बडा गहरा है…………सुन्दर रचना है।

विवेक सिंह said...

mitra srahaniya hai yaha bhi aye

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

wah boss ...
good poem with good connection ...

http://ravikavisisodia.blogspot.in/