Friday, August 14, 2009

इंतजार

अब ख़तम ये मेरी परीक्षा हो,
लम्बा ये बहुत इंतजार हुआ...

की थी इक कोशिश अरसे बाद,
उनसे कुछ बातें कहने की...
लब खामोश रह गए फिर आज,
आदत न गयी चुप रहने की...

इधर उधर की बातें की पर,
वो कह नहीं पाए जो कहना था...
बात की ही क्यूँ आखिर मैंने,
गर मुझे चुप ही रहना था...

डर इस बात का नहीं की उनको,
पा लूँगा या फिर खो दूंगा...
पर खो दिया गर उनको तो मैं,
किसी और का भी हो न सकूँगा...

रात बीत रही मेरी इसी सोच में,
समझा रहा हूँ मैं खुद को...
होता तभी है कुछ भी यहाँ,
होना होता है जब उसको...

वक़्त आये जल्दी ही अपना,
इतनी सी है उससे मेरी दुआ...
अब ख़तम ये मेरी परीक्षा हो,
लम्बा ये बहुत इंतजार हुआ...
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