Saturday, February 27, 2010

काश...

काश कुछ लम्हे ज़िंदगी के,
हो पाते Shift+Delete,
Text messages की तरह…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि रियल लाइफ में भी,
अच्छी लगती sad stories,
गीतों ग़ज़लों की तरह…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

आसमान में टूटा चाँद देखकर,
आया दिल में एक नेक ख़याल,
काश कि होता कोई product "FeviMoon"…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

सबको मिलता है trial version,
काश होता full version ज़िंदगी का,
और हम fake license key बना पाते…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

होता कोई option ज़िंदगी में,
format या system clean-up का,
काश हमें unlimited memory ना मिलती…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि पसंद ना आने पर,
कोई update ज़िंदगी का कर पाते,
uninstall या फिर system restore…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि एक ही click में,
हो जाते autocorrect,
ज़िंदगी के सारे syntax errors…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

ग़लतियाँ करके भी मिटा पाते,
काश कि ज़िंदगी के canvas में,
कोई eraser, कोई undo होता…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि होता कोई conservative field,
और हो पाती ज़िंदगी में भी,
कुछ reversible processes…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि minimize हो पाते,
Unwanted variations ज़िंदगी के,
किसी low, high या band fielter से…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि कम कर पाता,
ज़िंदगी की vibrations को,
कोई proper isolation system…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश ना आता कोई obstacle,
flow को turbulent बनाने,
या उसे neglect कर पाते…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

काश कि पता होते हमें,
हर outcome के required events,
और हो पाती reverse engineering…

मगर ये ज़िंदगी है, चलती रहेगी

कितनी आसान हो जाती ज़िंदगी,
बिल्कुल engineering की तरह,
पता जो हमें sorce code होता…

काश कि engineering की तरह
इतनी आसान हो पाती ज़िंदगी,
या फिर हम engineering student ना होते...

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