Saturday, December 05, 2009

सिगरेट भी पूरी नही जलती…

(1)
फ़ुर्सत निकाल कर ज़िंदगी से,
जाओ कभी वापस बचपन,

तुमको तुम मिल जाओ शायद
***
(2)
याद है मुझे अब भी वो दिन,
रो रही थी तुम शायद,

भीगी पलकों से ठीक से दिखा नही
***
(3)
रौशन करते जग को उमर भर,
नील गगन के तारे,

कहाँ जाते हैं ये टूट कर
***
(4)
जी लो ज़िंदगी जब तक है,
वरना ख़त्म तो ही जाएगी,

सुलगती सिगरेट है ज़िंदगी
***
(5)
कौन जी पाया है,
पूरी ज़िंदगी आज तक,

सिगरेट भी पूरी नही जलती
***
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