Monday, December 07, 2009

आखिर बुझ गया...

वो दीया,
हाँ वही,
जो जलता आ रहा है,
आंधी, पानी, तूफ़ान,
सब झेल गया,
और जलता ही रहा,
इस उम्मीद में,
के इक दिन पायेगा,
तेरे हाथों की छाँव,
और अमर हो जायेगा,
हमेशा हमेशा के लिए...
वो दीया!!!
आज हवा के,
एक हल्के झोंके ने,
बुझा दिया उसको,
हाँ,
ठीक समझा तुमने,
वही झोंका हवा का,
जो लेकर आई तुम,
अपने आँचल के साथ...
खुश ही होगा,
फिर भी वो दीया,
बुझा तो क्या,
आँचल तो तेरा था!!!
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