Tuesday, November 03, 2009

रह पाओ जिंदा मरने के बाद भी...


कभी लिखा था मैंने, 
"जियो कुछ ऐसे कि,
रह पाओ जिंदा तुम,
मरने के बाद भी..."
आज बात आगे बढा रहा हूँ अपनी...

गौतम बुद्ध की पावन धरती,
अब न रही महफूज़ यारों...

कब तक तुम खामोश रहोगे,
अब तो करो आगाज़ यारों...

गली अँधेरी अपनी ही है,
जागो, करो  उजाला यारों...

सोये हुए हैं बरसों से सब,
कोई सबको जगाओ यारों..

बुझे बुझे हैं दिल सबके,
कोई तो शमा जलाओ यारों...

जियो तुम कुछ इस तरह कि,
मरने के बाद भी जी पाओ यारों...
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