Sunday, November 08, 2009

चीज कमाल है बिसलेरी भी...


झूम उठा मेरा जहान,
तुम जो मिलने आई मुझे,
काश ये ख्वाब नहीं हकीक़त होता...

ठहर  पाए आँखों में,
निकल गए आंसू सारे,
तुम जो बसे हो इन आँखों में...

एक समंदर सा बना डाला,
इन आंसुओं का हमने देखो,
स्टॉक बहुत बड़ा है आंसुओं का...

बहुत रो रहे हैं हम आजकल,
सुना है आंसू नमकीन होते हैं,
तभी तो समंदर खारा हो गया है...

कितनी ही बोतल पी गया,
तेरे बिछड़ने के बाद,
चीज कमाल है बिसलेरी भी...
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