Thursday, November 19, 2009

'१० जनपथ' में 'जनता' ढूंढ़ रहा हूँ!!!

भूखे तुम, हम ऐश कर रहे
लोकतंत्र की जय जयकार,

आखिर तुमने हमें "चुना" है...
***
२ 
छुट्टियाँ खराब करके बनाया, 
एक सांचा उपर वाले ने, 

और तुझे बनाकर उसे तोड़ दिया...
***
३ 
बेशक बहुत मेहनत का, 
होता होगा खुदा का काम, 

तुझे देखकर यकीन हो आया है...
***
४ 
जनतन्त्र में, सुना था 
जनता का शासन होता है, 

शासन शोषण का फ़र्क खोज रहा हूँ...

(पहले ऐसा लिखा था:
५ 
जनतन्त्र में, सुना था 
जनता का शासन होता है, 

'१० जनपथ' में 'जनता' ढूंढ़ रहा हूँ!!!)
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