Tuesday, October 20, 2009

एक अरसे के बाद...


चाँद निकला है फिर,
आज अपनी गली में,
एक अरसे के बाद...

ये दिल-ए-बर्बाद भी,
देखो आबाद हुआ है,
आज बरसों के बाद...

न सुना ऐसा कभी पर,
है कमल रेत में खिला,
तेरे आने के बाद...

आके फिर से न जाना तुम,
जिंदगी ही चली जायेगी,
तेरे जाने के बाद...

थी भी कहाँ जिंदगी यहाँ,
साथ आई है तेरे वो भी,
एक अरसे के बाद...

चाँद निकला है फिर,
आज अपनी गली में,
एक अरसे के बाद...
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