Thursday, October 08, 2009

ज़माना सुलग उठा

गीत प्यार के सब लिखते हैं,
हम प्यार कर बैठे तो,
ज़माना सुलग उठा...

जीते हो अपनी जिंदगी हर रोज,
एक दिन हमारी जी ली तो,
ज़माना सुलग उठा...

कोई नहीं था बिना जाम के
उस महफिल में,
मैंने थोड़ी छलका दी तो,
ज़माना सुलग उठा...

तुने भी तो था दुपट्टे में मुखड़ा छुपाया,
मैंने तुझे छुपकर देख लिया तो,
ज़माना सुलग उठा...

तुने भी तो है देखा सपना मेरा,
मेरे ख्वाब में तुम आ गयी तो,
ज़माना सुलग उठा...

दिल में तो तेरे भी है मेरा ही नाम,
मैं होठों पर तेरा नाम ले आया तो,
ज़माना सुलग उठा...

नींद तो तेरी आँखों में भी नहीं,
मैं रात भर जगता रहा तो,
ज़माना सुलग उठा...
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