Monday, October 05, 2009

वो कली मुस्काई

वो कली मुस्काई,
और गुलाब बन गयी,
देखते ही हो जाये नशा,
ऐसा वो शराब बन गयी...

यूँ ही इतनी खूब थी,
वो सबका ख्वाब बन गयी,
निकली जब सज संवर के,
और लाजवाब बन गयी...

जिसने भी देखा एक झलक,
उसी के दिल का ताज बन गयी,
वो कली मुस्काई,
और गुलाब बन गयी...
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