Wednesday, October 21, 2009

तेरे ख़त, और उनके जवाब

तेरे वो सारे ख़त,
जो तुने कभी नहीं लिखे,
बस दिल में ही रखा,
और तुम समझती हो,
मुझ तक नहीं पहुंचे,
नहीं पहुंचे होंगे शायद,
पर उनके जवाब नहीं तो,
और क्या थे,
कागज़ के वो चंद टुकड़े,
जिन्हें आज जला आया हूँ...
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