Friday, October 16, 2009

ऐसे मनाएं हम ये दिवाली...

जब से यहाँ आया हूँ, दीपावली बहुत miss  करता हूँ... घर से बाहर ये मेरी तीसरी  दीपावली  है... और बिना पटाखों के ५वी ... जब से मुझे दीपावली का सही मतलब समझ में आया, मैंने पटाखे जलाने बंद कर दिए... इस दीपावली को सार्थक रूप में मनाने की अपील करता हूँ... 

बिना पटाखे, बिन जुए के,
आओ मनाएं हम ये दिवाली...

दीप जलाएं अंतर्मन का,
फुलझरियां हों खुशियों वाली,
मीठे बोल बनें मिष्ठान्न,
ऐसे मनाएं हम ये दिवाली...

खुशियाँ मांगे माँ से हम सब,
झोली कोई रहे न खाली,
द्वेष भाव सब मिट जाये,
ऐसे मनाएं हम ये दिवाली...

मतलब समझें पर्व का हम,
तभी मनाएं ईद दिवाली,
जीवन में ही उतर आये ये,
ऐसे मनाएं हम ये दिवाली..

Post a Comment